दक्षिण अफ्रीका से गुवाहाटी टेस्ट में मिली हार के बाद गौतम गंभीर बतौर हेड कोच का यह कहना कि उनके भविष्य का फैसला बीसीसीआई करेगा । यह बेहद निराशाजनक बयान है । मैच में जीत और हार कोई बड़ी बात नहीं है ,लेकिन चाहे वह टीम का कप्तान हो या हेड कोच उसे अपनी जिम्मेदारी लेनी पड़ती है । बेहतर तो यह होता कि वह कहते कि टेस्ट टीम में मिली हार के लिए हम सब जिम्मेवार हैं और हम पूरी निष्ठा से इस बात पर जोर देंगे कि भविष्य में हमसे होने वाली गलतियां ना हो ।जहां तक मुझे याद है कि भारत में सिर्फ एक ही ऐसा कप्तान हुआ है ,जो हार के बाद अपनी जिम्मेदारी तय करता था और फिर अगले मैच में पूरी ताकत से जुट जाता था । उसने न सिर्फ बेहतरीन इंडिया टीम बनाई बल्कि उसे मुकाबले के लिए जूझने की ताकत दी और वह कप्तान थे सौरव गांगुली। एक बात और जो हम है साउथ अफ्रीका से हार के बाद महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने कहा कि हमें अपने कमजोरी पर ध्यान देना होगा और हमारे श्रेष्ठ पूर्व खिलाड़ियों का उपयोग करना होगा।। उन्होंने सौरव गांगुली ,सचिन तेंदुलकर, पूर्व कोच रवि शास्त्री और पूर्व कप्तान एमएस धोनी के नाम लिए, लेकिन वर्तमान समय में बीसीसीआई के पदाधिकारी शायद इन बातों पर गंभीर नहीं है। दरअसल क्रिकेट हठ से नहीं चलता है। क्रिकेट बुद्धिमत्ता से चलता है और यह जब तक नहीं आएगी तब तक टीम इंडिया की दुर्दशा होती रहेगी।
बता दें कि इस सप्ताह दक्षिण अफ़्रीका ने भारत को रन के लिहाज़ से सबसे बड़ी टेस्ट हार दी।
ये पिछले 25 सालों में दक्षिण अफ़्रीका की भारत में आयोजित टेस्ट सिरीज़ में पहली जीत है।
पिछले एक साल में ये दूसरी सिरीज़ है जो भारत ने अपने घर में हारी है।भारतीय टीम ने पिछले 12 सालों से घर में कोई टेस्ट सिरीज़ नहीं हारी थी।
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