वीडियो या रील बनाना या कोई गुनाह नहीं है। बनाया जाना चाहिए, लेकिन जब सामने कोई डूब रहा या सामने कोई बहुत बड़ी मुश्किल में हो तो मदद ना करके उसकी रील बनाना या फिर वीडियो बनाना न सिर्फ गुनाह है ,बल्कि यह घटना मानवता को शर्मसार करती है। बीते कुछ समय से देखा जा रहा है कि कोई भी घटना होने पर लोग व्यू पाने के लिए रील बनाना शुरू कर देते हैं। जितनी तत्परता रील बनाने में दिखाते हैं अगर वह मदद करें तो शायद किसी की जान बच सकती है। ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर युवराज की जान कई लोगों के आंखों के सामने चली गई । कुछ तो लाचारी थी और कुछ प्रशासन की नाकामी, लेकिन वहां कुछ लोग ऐसे भी थे जो मदद करने के बजाय पूरे घटनाक्रम का रील बना रहे थे। एक लाचार बाप बार-बार मदद की गुहार लगा रहा था, लेकिन लोग रील बनाना उससे कहीं ज्यादा जरूरी समझ रहे थे। राज्य सरकार ने मामले की एसआईटी जांच के आदेश दे चुकी है। एसआईटी ने अपना जांच शुरू कर दिया है और अब तक कई अधिकारी सवालों के घेरे में आ चुके हैं, साथ ही कई बिल्डरों को गिरफ्तार किया गया है। राज्य सरकार इस मामले में बेहद सख्त रुख अपना रही है और एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद और भी कुछ लोगों पर गाज गिरेगी। नोएडा अथॉरिटी, पुलिस, फायर ब्रिगेड इस सारे सवालों के घेरे में है। घटना के बाद करीब एक घंटा से अधिक समय तक युवराज मदद मांगते रहे, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिली। एसआईटी रिपोर्ट में सभी कारण सामने आएंगे ,क्योंकि अब तक जो कारण आए हैं वह सिर्फ दलीलें हैं। हर कोई अपने बचाव में अलग-अलग दलील रख रहा है, लेकिन जांच के बाद साबित हो जाएगा कि इस मामले में कितनी लापरवाही हुई । युवराज के पिता की मांग है कि जिम्मेवार लोगों को सजा मिले। उनका बेटा तो चला गया ,लेकिन भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो । एक दौर वह भी था जब मुसीबत में देखते ही लोग तुरंत मदद के लिए खड़े हो जाते थे और आज लोग रील बना रहे हैं, लेकिन शायद उन्हें नहीं पता कि एक दिन वह भी किसी मुसीबत में होंगे और तब कोई और रील बना रहा होगा। मानवता का मतलब यह है कि अपना स्वार्थ छोड़कर आगे आना चाहिए ,तभी इस धरती पर मानवता जीवित रहेगी। हमें संवेदनशील होना होगा ,नहीं तो एक-एक करके हम सब रील होते चले जाएंगे।

