उत्तर प्रदेश के मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद के बलिया को लेकर दिए गए बयान से राजनीति में हलचल मची हुई है। सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी और सलेमपुर के सांसद रमाशंकर राजभर से लेकर कई संगठनों के भी इस पर बयान आए हैं। हर किसी का यही कहना है कि मंत्री जी को बलिया का अपमान करने का कोई हक नहीं है। मंत्री जी को अच्छे तरीके से बलिया का इतिहास नहीं पता है। बलिया कभी अंग्रेजों का दलाल नहीं रहा, बल्कि बलिया स्वतंत्रता संग्राम का सिरमौर रहा। अगर बलिया के मिट्टी में यह चीज होती तो मंगल पांडे जैसा वीर सपूत अंग्रेजों के खिलाफ 1857 में विद्रोह का बिगुल ना बजाया होता ।अगर बलिया के मिट्टी में कोई भी दाग होती तो 1942 में बलिया आजाद नहीं हुआ होता। यह वही बलिया है जिसके महान सपूत 1942 में अंग्रेजों से टकराते हुए अपनी प्राणों की आहुति दे दी। मंत्री जी को बैरिया में जाकर शहीद स्मारक देखनी चाहिए। लगभग एक दर्जन से अधिक लोगों ने अपनी जान अंग्रेजों से जूझते हुए दी थी। बलिया के चितु पांडे का इतिहास मंत्री जी को पढ़ना चाहिए और अगर फुरसत लगे तो उन्हें बांसडीह क्षेत्र के बकवा गांव के गजाधर शर्मा का इतिहास पढ़ना चाहिए ,जो अंग्रेज हुकूमत को भागते हुए 19 दिनों के लिए पूरी बलिया और बांसडीह की बागडोर संभाली थी ।बलिया को अंग्रेजों का बिचौलिया कहना यह बिल्कुल तथ्यहीन है ।इसकी जितनी निंदा की जाए कम है ।एक तरह से देखा जाए तो मंत्री जी ने न सिर्फ बलिया के लोगों का अपमान किया है ,बल्कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का अपमान किया है ।क्या बागी बलिया ऐसे ही नाम मिला है। जी नहीं इसके लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने बड़ी कुर्बानी दी ।यह बलिया की मिट्टी है जो कभी किसी की गुलामी नहीं की । मंत्री जी को याद रखना चाहिए कि जनता को कुछ कहने से पहले कई बार सोचना चाहिए ।हो सकता है की अंग्रेजों के समय काल में सिस्टम के लिए कुछ लोगों ने मुख्य मुखबिरी की हो, लेकिन इसको लेकर आप पूरे बलिया की जन भावना को आहत नहीं कर सकते हैं ।योगी महाराज को इस पर संज्ञान लेना चाहिए ,क्योंकि यह किसी व्यक्ति का अपमान नहीं बल्कि पूरे जिले की भावनाओं का अपमान है ।शहादत देने वालों में सभी जाति के लोग शामिल थे । यह किसी एक जाति व धर्म का भी प्रश्न नहीं है ।मंत्री जी को सामने आकर इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ।

