इस दुनिया से एक दिन सबको जाना होता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इस दुनिया में एक नाम छोड़कर जाते हैं। ऐसे ही थे साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल। उनको पढ़ने मात्र से उनके बारे में सब कुछ समझ में आ जाता है। छत्तीसगढ़ में जन्में हिंदी साहित्य के मशहूर कवि, कथाकार और उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन हो गया है। उनका छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित एम्स में इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने 88 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। विनोद कुमार शुक्ल जी को करीब एक महीना पहले ही भारत के सर्वोच्च साहित्य सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हुए थे। शुक्ल जी लंबे समय से बीमार चल रहे थे। सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें दो दिसंबर को एम्स में भर्ती कराया गया था, जहां वेंटिलेटर पर ऑक्सीजन सपोर्ट के दौरान उन्होंने आज शाम को अंतिम सांस ली। हिंदी साहित्य में उनके असाधारण योगदान के लिए वर्ष 2024 में उन्हें 59वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था। वे इस प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित होने वाले हिंदी के 12वें साहित्यकार और छत्तीसगढ़ के पहले लेखक थे।

