प्रधानमंत्री जी के बयान के बाद इतना तो तय है कि मानसून सत्र की तरह ही शीतकालीन सत्र भी हंगामा की भेंट चढ़ जाएगा। माना कि विपक्ष की चुनाव में करारी हार हुई है पर उन्होंने जिस तरह से बयान दिया है वह जले पर नमक छिड़कने जैसा है। जब प्रधानमंत्री यह कहते हैं कि काम करो ड्रामा नहीं तो वहीं विपक्ष की नेता प्रियंका गांधी कहती हैं कि ड्रामा तो प्रधानमंत्री जी आप कर रहे हैं ताकि संसद में असल मुद्दों पर चर्चा ही ना हो सके। दअसल संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया है और पहले ही दिन से माहौल गरम होता दिख रहा है। बड़ा सवाल यह है कि क्या मानसून सत्र की तरह इस बार भी एसआईआर का मुद्दा कार्यवाही में बाधा बनेगा? यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि एसआईआर इस समय देश की राजनीति का सबसे बड़ा बहस का केंद्र बना हुआ है। बिहार में एसआईआर शांतिपूर्वक पूरा हो गया और चुनाव भी संपन्न हो गए, लेकिन विपक्ष अब भी इसे अपना मुख्य मुद्दा बनाए हुए है।
हम आपको बता दें कि एक दिन पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने एक सुर में एसआईआर पर विस्तृत चर्चा की मांग रखी थी और आज सत्र की शुरुआत से पहले भी कार्य स्थगन नोटिस देकर संकेत साफ कर दिए कि यह सत्र टकराव और हंगामे से भरा रह सकता है।
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्र से पहले उम्मीद जताई कि यह बैठकें सकारात्मक और सार्थक होंगी। साथ ही उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि दुर्भाग्य यह है कि “1-2 दल अभी भी अपनी पराजय पचा नहीं पा रहे हैं।” पीएम ने दो टूक कहा कि संसद में “ड्रामा नहीं, डिलीवरी होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विपक्ष भी अपना दायित्व निभाए, चर्चा में मजबूत मुद्दे उठाए। पराजय की निराशा से बाहर निकलकर आएं। दुर्भाग्य ये है कि 1-2 दल तो ऐसे हैं कि वो पराजय भी नहीं पचा पाते। मैं सोच रहा था कि बिहार के नतीजों को इतना समय हो गया, तो अब थोड़ा संभल गए होंगे। लेकिन, कल जो मैं उनकी बयानबाजी सुन रहा था, उससे लगता है कि पराजय ने उनको परेशान करके रखा है… उनसे मेरा आग्रह है कि पराजय की बौखलाहट को मैदान नहीं बनना चाहिए।


