आप को देश के 8 वे प्रधानमंत्री वीपी सिंह तो याद

होंगे ही। इन्हीं के मंडल कमीशन की सिफारिश पर देश में अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण हासिल हुआ ।यह भी उतना ही सत्य है कि उनके इस फैसले के बाद उनकी सरकार हिल गई और उन्हें प्रधानमंत्री के पद से हटाना भी पड़ा। लेकिन यह भी बात उतनी ही सत्य है कि अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण का हथियार देने वाले मसीहा वी पी सिंह भुला दिए गए। मंडल कमीशन के सिफारिश को लागू करने के बाद मुलायम सिंह यादव और लालू प्रसाद यादव जैसे नेताओं का उदय हुआ और वह राजनीति के धरातल पर छा गए ,लेकिन समय के साथ बीपी सिंह यानी विश्वनाथ प्रताप सिंह राजनीति के पटल से गायब होते चले गए। दरअसल अगड़ी जातियों को उनका यह फैसला पसंद नहीं आया और अन्य पिछड़ा वर्ग ने उन्हें राजनीति में वह समर्थन नहीं दिया जो उन्हें मिलना चाहिए था और इस तरह से उनका राजनीतिक जीवन समाप्त हो गया। लेकिन इतना तो कहना ही होगा कि उन्होंने जो निर्णय किए वह जन सरोकार की क्षितिज पर आज भी नजर आ रहा है। जी वी.पी. सिंह भारत के 8वें प्रधानमंत्री (2 दिसंबर 1989 से 10 नवंबर 1990 तक) थे। उनका कार्यकाल सामाजिक न्याय के संदर्भ में ऐतिहासिक रहा, विशेष रूप से आरक्षण नीति में। उनका सबसे महत्वपूर्ण फैसला मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करना था, जिसने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षण का द्वार खोला। यह फैसला भारतीय राजनीति और समाज को हमेशा के लिए बदल गया। मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू करना । वी.पी. सिंह ने संसद में घोषणा की कि मंडल कमीशन (1979 में गठित, 1980 में रिपोर्ट सौंपी गई) की सिफारिशों के अनुसार, केंद्रीय सरकार की नौकरियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में OBC के लिए 27% आरक्षण प्रदान किया जाएगा। इससे पहले, SC/ST के लिए 22.5% आरक्षण था। इस फैसले से कुल आरक्षण 49% हो गया (SC 15%, ST 7.5%, OBC 27%)। कमीशन ने 3,743 जातियों को पिछड़ा घोषित किया था और सामाजिक-शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया। जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करना और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना। यह दुनिया का सबसे बड़ा सकारात्मक कार्रवाई कार्यक्रम था। इस फैसले ने OBC समुदायों को सशक्त बनाया और जाति-आधारित राजनीति को जन्म दिया। इससे लालू प्रसाद यादव, मुलायम सिंह यादव जैसे नेताओं का उदय हुआ और क्षेत्रीय दल मजबूत हुए। उत्तरी और पश्चिमी भारत में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। छात्रों ने आत्मदाह किए (लगभग 60 मौतें)। यह “एंटी-मंडल आंदोलन” के रूप में जाना गया।वी .पी. सिंह सरकार के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 27% OBC आरक्षण को बरकरार रखा, लेकिन 50% आरक्षण की सीमा तय की और क्रीमी लेयर(आर्थिक रूप से संपन्न OBC) को बाहर करने का प्रावधान किया। जाति को पिछड़ेपन का संकेतक माना गया।

