देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए आईएनडीआईए गठबंधन की ओर से रामलीला मैदान में ऐतिहासिक जनसभा की गई है ।जनसभा में लोगों की संख्या कितनी थी, इसको लेकर अलग-अलग मत हो सकते हैं, लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं है कि बड़े पैमाने पर लोग इंडिया गठबंधन को नेताओं को सुनने के लिए वहां पहुंचे थे । इंडिया गठबंधन के मॉक पार्लियामेंट के बाद रामलीला मैदान की जनसभा में देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने को लेकर हुंकार भरी गई। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि आप मेरी बातें नोट कर लो ज्ञानेश कुमार पद से भी हटेंगे और जेल भी जाएंगे ।उन्होंने तो यह भी कहा कि हमारी दुश्मनी ना तो ज्ञानेश कुमार से है, ना प्रधानमंत्री मोदी से है और ना ही गृह मंत्री अमित शाह से है। हम प्यार करने वाले लोग हैं। हम मोहब्बत की दुकान चलाते हैं ,लेकिन यह बात संविधान बचाने की है । ज्ञानेश कुमार ने संविधान की आत्मा को चोट किया है। लोगों को वोट के अधिकार को छीनने का काम किया है और यह लोकतंत्र के लिहाज से बेहद ही संवेदनशील मुद्दा है । हम इस मामले पर ज्ञानेश कुमार को छोड़ने वाले नहीं, चाहे इसके लिए हमें कितनी भी लड़ाइयां लड़ी पड़े। हम लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। इससे पहले मॉक पार्लियामेंट में ज्ञानेश कुमार पर जन महाभियोग चलाया गया और साफ शब्दों में कहा गया कि आने वाले समय में यह हकीकत भी बनेगी।
इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह की चली गई थी सरकार:
बता दे की रामलीला मैदान में देश के इतिहास में अब तक चार बड़ी आंदोलन से जुड़ी सभाएं हुई है और इसमें दो बार केंद्र की सत्ता जा चुकी है । इस बार क्या होगा, इस पर कुछ कहना जल्दी बाजी होगी, लेकिन 1952 में सबसे पहले डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इस मैदान पर जनसभा की थी, जो धारा 370 और जम्मू कश्मीर परमिट के खिलाफ थी। इसके बाद 1975 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में यहां जन आंदोलन हुआ था ,जिसके बाद ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी ।उसके बाद ही अगले चुनाव में इंदिरा जी की सरकार चली गई थी ।वहीं वर्ष 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में यूपीए सरकार के खिलाफ बड़ा जन आंदोलन हुआ था, जिसके बाद देश में एक माहौल बना और 2014 में यूपीए की केंद्र की सत्ता से चली गई और भारतीय जनता पार्टी का आगमन हुआ। अब इस रामलीला मैदान में एक बार फिर से इंडिया गठबंधन का सत्ता के खिलाफ जन आंदोलन हुआ है ।माना जा रहा है कि इस जन आंदोलन से कम से कम सरकार न भी जाए तो ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा । जानकारों का भी कहना है कि ज्ञानेश कुमार का मुद्दा इतना आसानी से दबाने वाला नहीं है। यह मुद्दा समय के साथ तूल भी पकड़ेगा और एक न एक दिन ज्ञानेश कुमार को हटाना ही होगा।राजनीति में कब कौन सी घटनाक्रम हो जाए यह कहना मुश्किल है। हमें इंतजार करना होगा कि आने वाले दिनों में ज्ञानेश कुमार को लेकर और क्या कुछ होता है।
फोटो साभार: बीबीसी हिंदी

