यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के लिए गले का फांस बनते चला जा रहा है। नए यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 के सर्कुलर को लेकर भारी बवाल मचा हुआ है। सवर्णों द्वारा इसका जबरदस्त तरीके से विरोध किया जा रहा है और पुराने यूजीसी रेगुलेशन को वापस लाने की मांग की जा रही है । उत्तर प्रदेश में 11 सीटों के लिए हुए एमएलसी चुनाव में इसका साफ तौर पर असर भी दिखा। एमएलसी स्नातक के सीटों पर हुए चुनाव में बैलेट पेपर पर सीधे तौर पर यूजीसी रोल बैक के हजारों मत पत्र डाले गए । ऐसे में उन सभी मत पत्र रद्द कर दिया गया,लेकिन सरकार तक एक मैसेज जरूर गया कि अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इसकी गंभीर परिणाम हो सकते हैं ।वोहो सकता है कि इसका फायदा विरोधी दल उठा ले जाए। हालांकि यह सरकार के लिए मुश्किल का सबब बन चुका है । यदि वह पुराने रेगुलेशन को लेकर आती है तो दूसरे वर्ग के लोग नाराज हो जाएंगे और अगर यह बिल वापस नहीं हुआ तो सवर्ण तो पहले से ही विरोध स्वरूप झंडा उठाए हुए है। ऐसे में जो जानकारों का कहना है कि सरकार को मुसीबत से एकमात्र कोर्ट की बचा सकता है। अगर सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से जोरदार तरीके से सामाजिक एकता का हवाला देते हुए पैरवी की जाए तो शायद पुराने सर्कुलर को बहाल कर दिया जाए और साथ ही कुछ नए प्रावधान भी दिए जा सकते हैं, ऐसे में सरकार मुश्किलों से बच सकती है। दो दिन पहले जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य प्रयागराज में एक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन सवर्ण वर्ग के द्वारा बुलाया गया था। तब दो युवाओं ने खड़े होकर कहा कि उपमुख्यमंत्री जी आप यूजीसी रेगुलेशन पर अपनी बात साफ कीजिए। अपनी पार्टी की ओर से आप स्पष्ट कीजिए कि आप क्या सोचते हैं। इस पर केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि हम हर बात का जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन इस वक्त उन नौजवानों के साथ भाजपा के एक स्थानीय पार्षद के साथ मारपीट हो गई। अब आलम यह है कि खुद भाजपा के अंदर से भी विरोध के सुर उभरने लगे हैं। खासतौर से जो सवर्ण के हिमायती नेता है उनकी ओर से भी मांग की जाने लगी है कि इस मसले पर गंभीरता से विचार किया जाए।
देखना है कि आने वाले दिनों में सरकार यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 को लेकर क्या कुछ नए तरीके लेकर आती है।
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