भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जब प्रधानमंत्री का पद संभाले थे ,तो देश कई तरह की गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था। अंग्रेजों ने इसे जब छोड़ा तो पूरी तरह से बर्बाद करके ही गए। सबसे पहले उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच में बटवारा कर दिया, जिसका दंश देश आज तक झेल रहा है । कुछ ही समय बाद चीन के साथ युद्ध हो गए और उसी के इर्द-गिर्द देश में अकाल भी पड़ा । यह वह दौर था जब इंसान रोटी, कपड़ा और मकान की समस्या से जूझ रहा था। नेहरू जी ने सीमित संसाधनों के बीच धीरे-धीरे देश को विकास की पटरी पर ले चलने का काम किया । सबको साथ लेकर उन्होंने भारत की नींव रखी ,जिससे हम शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी के क्षेत्र में धीरे-धीरे आत्मनिर्भर होने लगे। नेहरू जी ने नवरत्न जैसे कंपनियों का गठन किया, जो देश के तरक्की में भागीदार बनी। इसके बाद इंदिरा ने इस देश को एक आक्रामकता देने का काम किया। उनकी आक्रामक नीति के चलते ही देश आत्मसम्मान हासिल कर सका। इसके बाद के प्रधानमंत्री ने एक-एक करके इस देश को दिशा देने का काम किया। वर्तमान समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस देश को आगे ले जाने की दिशा में अपने स्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन इस सरकार में एक बड़ी खामी जो दिख रही है वह है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और तकनीकी पर बेहद कम ध्यान दिया जा रहा है । तकनीकी का तात्पर्य रिसर्च वर्क से है। इस सरकार में रिसर्च वर्क बिल्कुल ही धराशाई हो चुकी है। इसको संभालने की जरूरत है ।अगर आप रिसर्च नहीं करेंगे तो वैश्विक स्तर पर आपकी पहचान धूमिल होती चली जाएगी और आप पिछलगु बनके रह जाएंगे । रिसर्च वर्क के जरिए हम देश दुनिया में अपनी धाक जमाते हैं। ऐसा भी नहीं कि भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी है । भारत बेहद प्रतिभा संपन्न राष्ट्र है। बशर्ते कि इसे सही दिशा देने की जरूरत है। युवा आबादी वाला देश उड़ान भरने को तैयार है ,पर ब शर्तें की इसकी नब्ज पहचानी जाए । राजनीति हो देश में लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य , रिसर्च के मामलों में राजनीति न की जाए। क्योंकि राजनीति अगर सकारात्मक हो तो चीज तो बनती है, लेकिन अगर नकारात्मक हो जाए तो फिर देश की रह डगमगा जाएगा। पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेवारी है कि इस देश को सही रास्ते पर ले जाए ।

