शंकराचार्य अविमुक्तेश्वर मामले में एकाएक नया मोड़ आ गया है ।प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने उनके शिविर के गेट पर एक नोटिस चिपकाए हैं। नोटिस में कहा गया है कि वह प्रमाण दे कि वह शंकराचार्य हैं ।नोटिस चिपकने के बाद चारों ओर चर्चा का माहौल गर्म हो गया है। वही शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरनंद ने कहा कि यह बात ठीक है कि उनसे जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है ,लेकिन शासन को सुप्रीम कोर्ट के कंधे पर बंदूक चलाने के बजाय सीधे सवाल जवाब करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सब किसके इशारे पर हो रहा है ,वह समझ रहे हैं ।उनका इशारा सीधे तौर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर था। उनका यह भी कहना था की कुंभ मेला हादसे के बाद उन्होंने सरकार की आलोचना की थी ,इसी कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। दरअसल पूरा वाक्य 2022 का है जब उनके ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य होने को लेकर याचिका कोर्ट में गई थी । मामला सुप्रीम कोर्ट में अभी भी लंबित है । यही कारण है कि बढ़ते विवाद के बीच अब नोटिस देकर उनसे शंकराचार्य होने के सबूत मांगे गए हैं । दो दिन पहले ही शंकराचार्य माघ मेले में संगम तट पर स्नान के लिए गए थे। वह रथ पर सवार होकर निकले थे। शासन ने रास्ते में ही उन्हें रोक दिया था और कहा था पैदल जाइए ,क्योंकि भीड़ बहुत है और व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है। इसके बाद ही उनके शिष्य शासन के अधिकारियों के साथ भीड़ गए थे ,जिसके बाद आपस में काफी कुछ हुआ और अब जो कुछ सामने आ रहा है, वह कानूनी प्रक्रिया है। हालांकि शंकराचार्य पिछले 48 घंटे से अनशन पर थे और वह बार-बार कह रहे हैं कि यदि प्रशासन उनसे माफी मांगे तो वह यहां से लौट जाएंगे । संगम स्नान करने वह हर बार आएंगे ,लेकिन फुटपाथ पर बैठेंगे। वह शिविर नहीं लगाएंगे ।अब देखना है कि शासन और उनके बीच शुरू हुई जंग कब खत्म होती है।

