चीन ने शक्सगाम घाटी पर अपना क्षेत्रीय दावा दोहराया है। भारत की आपत्तियों के बावजूद चीन ने कहा कि उसका रुख अपरिवर्तित है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि “जिस इलाके का आप जिक्र कर रहे हैं, वह चीन का अपना क्षेत्र है।” उन्होंने जोर दिया कि “चीन की अपनी जमीन पर बुनियादी ढांचा गतिविधियां पूरी तरह उचित और बेदाग हैं।”
– चीन ने 1960 के दशक में पाकिस्तान के साथ हुए सीमा समझौते का हवाला दिया और कहा कि यह दोनों संप्रभु देशों का अधिकार है।
– चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा को आर्थिक विकास के लिए बताया, जो स्थानीय लोगों के जीवन स्तर सुधारने का काम करता है। उन्होंने कहा कि इससे कश्मीर मुद्दे पर चीन का रुख नहीं बदलेगा, और वह UNSC प्रस्तावों तथा द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।
भारत का पक्ष:
– भारत ने पिछले शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के जरिए कड़ी आपत्ति जताई थी।
– उन्होंने कहा: शक्सगाम घाटी भारतीय क्षेत्र है कि हमने 1963 के तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को कभी मान्यता नहीं दी। यह समझौता अवैध और अमान्य है।”
यह भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरता है, जहां पाकिस्तान का अवैध कब्जा है।
पृष्ठभूमि:
पाकिस्तान ने 1963 में 5,180 वर्ग किमी के शक्सगाम घाटी क्षेत्र को (जो पहले उसके अवैध कब्जे में था) चीन को सौंप दिया था। भारत इसे जम्मू-कश्मीर का हिस्सा मानता है और इस समझौते को अवैध बताता है। हाल ही में रिपोर्ट्स में कहा गया कि चीन यहां सड़क निर्माण कर रहा है (लगभग 75 किमी पूरी हो चुकी है)। यह क्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर के पास रणनीतिक महत्व रखता है।

