अरावली मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अरावली क्षेत्र में अब भी अवैध खनन चल रहा है और वह जल्द ही एक विशेषज्ञ कमेटी का गठन करेंगे ताकि इस पर रोक लगाई जा सके। सुप्रीम कोर्ट यही नहीं रुकता है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई करें कर रहे तीन जजों की खंडपीठ ने कहा है कि अगर ऐसे ही चलता रहा तो हालात इस कदर बिगड़ेंगे कि उसे सुधारना ही मुश्किल हो जाएगा। अवैध खनन को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीर अपराध बताया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने गुजरात सरकार से अवैध खनन मामले में गारंटी भी मांगी है। वहीं मामले की सुनवाई फिर से चार सप्ताह के बाद की जाएगी। इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्र से विशेषज्ञों की कमेटी बनाने पर जोर दिया गया है।
नई परिभाषा स्वीकार किए जाने का हुआ था विरोध:
बता दे कि इससे पहले 20 नवंबर को केंद्र सरकार की ओर से अरावली को लेकर दी गई नई परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था। इसके बाद से ही विरोध तेज हो गया था। नई परिभाषा के मुताबिक100 मीटर से कम ऊंची अरावली की पहाड़ियों में खनन किया जा सकता था। इसके बाद से पर्यावरणविद और स्थानीय लोगों द्वारा जबरदस्त तरीके से विरोध किया गया था और कहा गया था कि ऐसा होने से अरावली पहाड़ी श्रृंखला पर ही संकट आ जाएगा और धीरे-धीरे यह श्रृंखला खत्म हो जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के इस नई परिभाषा के स्वीकार लिया जाने के बाद से खनन का दायरा बढ़ जाएगा। सिर्फ यही नहीं दिल्ली, हरियाणा ,पंजाब और राजस्थान तक अरावली के क्षेत्र में व्यापक आंदोलन शुरू होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह से इस क्षेत्र में खनन पर रोक लगा दी थी। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि समुचित प्रक्रिया को देखने के बाद ही अब नए सिरे से खनन जैसी बातों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल यह क्षेत्र पूरी तरह से खनन मुक्त किया जाता है ।
दरअसल 2009 में अरावली को लेकर एक परिभाषा तैयार की गई थी ,जिसमें 30 मीटर से नीचे की पहाड़ियों को खनन के दायरे में लाया गया था । अब नई परिभाषा में 100 मीटर से नीचे के पहाड़ियों को अरावली नहीं मानने की बात कही गई थी । अब देखना है कि चार सप्ताह बाद सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद क्या चीजें तय होती है।

