प्रयागराज के माघ मेले में अनशनरत शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के शिविर में कुछ युवकों द्वारा घुसकर नारेबाजी करने के बाद एक बार मामला फिर से गरमा गया है। एक तरह से कहे तो धीरे-धीरे यह घटनाक्रम राजनीति के तरफ जा रहा है। हिंदू संगठन से जुड़े जिन्होंने अविमुक्तेश्वर महाराज के शिविर में घुसने का प्रयास किया वह योगी आदित्यनाथ जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे । इसके बाद से ही शंकराचार्य के शिष्यों ने थाना में न सिर्फ शिकायत दर्ज कराई है बल्कि शिविर को चारों ओर से ढक दिया है। उसके प्रवेश मार्ग को भी जाम कर दिया है, ताकि कोई अंदर की तरफ आ न सके। अब एक बार फिर से मामला राजनीतिक रंग लेते हुए दिख रहा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वर महाराज पहले ही योगी आदित्यनाथ को पूरे प्रकरण के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे, लेकिन अब सीधे तौर पर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। पहले माना जा रहा था कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के निवेदन के बाद यह मामला खत्म हो जाएगा, जिस तरह से शंकराचार्य ने भी उनकी टिप्पणी पर रिएक्शन दिया था, उससे तो यही लगता था। लेकिन अचानक से कल की घटनाक्रम के बाद फिर से स्थिति जटिल हो गई है। शंकराचार्य गौ सुरक्षा को लेकर एक प्रेरणा यात्रा भी निकलने वाले थे, जिसे स्थगित कर दिया गया है। इधर सपा प्रमुख अखिलेश यादव न सिर्फ शंकराचार्य का समर्थन कर रहे हैं बल्कि उन्हें ढोंगी सनातनियों का पर्दाफाश करने वाला भी बता रहे हैं। जिस तरह से यूपी की राजनीति में यह घटनाक्रम हुआ है उससे कहीं ना कहीं राजनीतिक तौर पर भाजपा को ही नुकसान पहुंचाने वाला है। हालांकि अब देखना है कि इस घटनाक्रम का का अंत कैसे होता है।

