अमेरिका के वेनेजुएला पर कार्रवाई ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। नए साल की शुरुआत में यह एक ऐसी घटना है जिस पर हर कोई मंथन कर रहा है। हर किसी के मन में यही सवाल उठ रहा है कि क्या यह सही हुआ या गलत। विशेषज्ञ इस पर अपने-अपनी राय दे रहे हैं। दुनिया के कई देश इस पर अपनी प्रक्रियाएं दे चुके हैं।अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर उसके लंबे समय से सत्ता में काबिज निरंकुश राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पद से हटा दिया है। 1989 में पनामा पर आक्रमण के बाद लैटिन अमेरिका में वाशिंगटन का यह सबसे सीधा हस्तक्षेप है। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पोस्ट में कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने वेनेजुएला और उसके नेता, राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ सफलतापूर्वक एक बड़ा हमला किया है। मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया गया है और देश से बाहर भेज दिया गया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम वेनेजुएला के लोगों के साथ अपनी एकजुटता की पुष्टि करते हैं और देश के राष्ट्रीय हितों और संप्रभुता की रक्षा के लिए उसके बोलिवेरियन नेतृत्व द्वारा अपनाए गए मार्ग के प्रति अपना समर्थन व्यक्त करते हैं।
ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ताक पर रख दिया?
अमेरिका के हमले के बाद रूस, चीन भी हरकत में आ गए हैं। रूस की तरफ से बयान जारी किया गया है। रूस के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका द्वारा की गई सशस्त्र आक्रामकता की निंदा की और संयम बरतने का आग्रह करते हुए राजधानी काराकास में तड़के हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के बाद स्थिति को और बिगड़ने से रोकने की चेतावनी दी। वहीं चीन ने आपातकात मीटिंग बुलाई। इन सब के बीच नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन का भी बयान सामने आया है। किम जोंग उन ने अमेरिका को सीधी धमकी दे डाली है। उत्तर कोरियाई तानाशाह ने कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति को तुरंत रिहा किया जाए। इसके साथ ही अमेरिका को धमकाते हुए किम जोंग ने कहा कि ऐसा नहीं करने पर गंभीर वैश्विक परिणाम होंगे।

